श्री राम पादुका एंव राम मंदिर (मासी-पन्याली)

राम पादुका पन्याली (मासी )
श्री राम पादुका एंव राम मंदिर (मासी-पन्याली)

अल्मोड़ा में राम गंगा के किनारे बसा मासी बाजार मासी से तक़रीबन ढाई किलोमीटर की दुरी पर कोट्युडा ग्राम के निकट भगवान् श्री राम जी का मंदिर है ! माना जाता है कि मुनि विस्वमित्र जी यज्ञ किया करते थे। असुरों ने श्री विस्वमित्र जी को इस रमणीक स्थान को छोड़ने पर मजबूर करने लगे । असुरों के अतंग से चिंतित होकर एक दिन विस्वमित्र जी श्री राजा दशरथ जी के पास गये और भगवन राम और लक्ष्मण जी को अपने साथ ले जाने की अनुमति मागी थी ! भगवान् राम और लक्ष्मण दोनों भाई इस देवभूमि में आकर असुरों का सर्वनास कर दिया । श्री विस्वामित्र जी ने प्रभु से कहा । हे प्रभु ! आप यहाँ आ ही गये हो कुछ ऐसा कीजिये जिस से यहाँ के लोग आपकी चरणों की रज पा सके । विश्वामित्र के निवेदन से भगवान राम जी ने अपने चरण पाद छोड़े अविरल बहाने वाली नदी जो भगवान राम के पद चिन्हों को छू कर निकलती है यही रामपदुका से ही इस का नाम रामगंगा पड़ा । इस का वर्णन स्कन्द पुराण में किया गया है । आज भी यहाँ पर यह पौराणिक मंदिर में श्री राम जी के चरण चिन्ह हैं । इस जगह को आज भी बहुत बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है । १ गाते बैसाखी के दिन यहाँ पर बहुत बड़ा मेला लगता है प्रात: ४ बजे लोग स्नान करने पहुँच जाते हैं और उसे दिन लोग जनेऊ संस्कार व पित्रों का श्राद्ध उठाते हैं । कहते हैं उस दिन जो यहाँ स्नान करता है उस के संकट कम हो जाते हैं (साथियों जीवन में यदि संकट ही न हो तो कैसे पता चलेगा की दुःख और सुख क्या है भगवान की कृपा से रोग-दोष कुछ कम हो जाते हैं )
राम पादुका मंदिर के ठीक सामने श्री इन्द्रेस्वर प्रभु शिव संकर जी का मंदिर भी स्थित है कहा जाता है कि जब देवराज इन्द्र को ब्रह्म हत्या का दोष लगा था, तब उन्होंने इसी जगह पर कई वर्षों तक तपस्या की तदोपरांत भगवान शिव ने ब्रह्म हत्या से मुक्त कर इस शिवालय हो इन्द्रेश्वर का नाम दिया ।
गेवाड़ घाटी में इसे रमणीक स्थल होने के कारन इसे धर्म भूमि भी कहा जाता है कहते हैं - इस गेवाड़ घाटी में सबसे अधिक हवन यज्ञ हुआ करते थे ।
इसे रमणीक स्थल को को मैं कोटि कोटि नमन करता हूँ

लेख- पं भास्कर जोशी जी
चित्र -भगवत सिंह बिष्ट जी 

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